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शामी

जौनपुर  से  सात-आठ  किलोमीटर  दूर  हरजुपुर  था|  मेरे  मामा-नाना  का  वहाँ  घर  था|  मुझे  मामा  का  ही  ज़्यादा  साथ  मिलता  था|  नाना  बैलगाड़ी  चलाते  थे  सो  वे  अक्सर  घर  से  बाहर  रहते  थे|  वहाँ  लहराते  हरे-भरे  खेत  थे|  उनमें  लहराती  मटर  की  हरी-हरी  फलियाँ  मुझे  बहुत  प्यारी  थी|  गाँव  के  पास  ही  अमराई  थी  और  […]

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शादी

दोस्ती  बड़ी  चीज़  है,  दोस्त  के  लिए  इंसान  क्या  नहीं  करता|  दोस्त  के  लिए  तन  मन  कुर्बान  किया  जा सकता  है|  धन  की  मैं  बात  नहीं  करता|  अव्वल  तो  इसकी  अपने  पास  हमेशा  कमी  रहती  है|  दूसरे,  अगर  किसी  को  दे  दिया  तो  इसका  अता  पता  नहीं  मिलता|  मैं  थोड़ा  सलीकेदार  हूँ,  इसलिए  उसके  कई  […]

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लोक कथायें

आज देर रात तक कलम घिस रहा हू. संपादक जी ने लोक कथा माँगी थी, सुबह उन्हें चाहिए. सो रात को काग़ज़ कलम लिए बैठा हू और लिख रहा हू. फकत एक लोक कथा का सवाल है. आजा री लोक कथा, आजा री. लोक कथा तो आई नहीं, नींद आ धमकी. सो मैं नींद भगाने के […]

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