लोक कथायें

आज देर रात तक कलम घिस रहा हू. संपादक जी ने लोक कथा माँगी थी, सुबह उन्हें चाहिए. सो रात को काग़ज़ कलम लिए बैठा हू और लिख रहा हू. फकत एक लोक कथा का सवाल है. आजा री लोक कथा, आजा री. लोक कथा तो आई नहीं, नींद आ धमकी. सो मैं नींद भगाने के लिए कलम चलाने लगा और लिखने लगा. एक था राजा और उसके थे छे राजकुमार. नींद ने पीछा ना छोड़ना था, ना छोड़ा. मेरे सामने छ्हो राजकुमार पंक्तिबद्ध खड़े थे ..


उनमें से सबसे बड़ा ही बोला, हम बड़े राजकुमारों ने आपका क्या बिगाड़ा है की आप सबसे छोटे को महिमा मंडित करने जा रहे थे ? मैने पूछा, आप ऐसा क्यूँ कह रहे हैं ? बड़े ने कहा, आप लिखेंगे, एक राज्य था जिसके छे राजकुमार थे जिन्हें अट्टापट्टू का दूध लाने का काम सौंपा गया था. पहाड़ी पर बनी एक गुफा में एक बकरी थी जो वही कम्बखत दूध दे सकती थी और उसी दूध से राजा की चहेती सौतेली की आँखें ठीक हो सकती थी. एक एक करके आप हम सब बड़े राजकुमारों को असफल बनाएँगे. तब तक छोटा राजकुमार इंतेज़ार करता रहेगा और फिर सबकी हेटी करते हुए दूध ले आएगा.

फिर आप लिखेंगे की दूर दराज़ एक देश की राजकुमारी को राक्षस उठा के ले गया. उस राजकुमारी को बचाने के लिए, उस राक्षस की जान लेनी ज़रूरी थी. उस राक्षस की जान भी उसके जिस्म में ना होकर दूर किसी द्वीप पर लगे पीपल के पेड़ से लटके तोते में थी. लोक कथाओं में ये क्या मुसीबत होती है की राक्षस की जान उसमें खुद में ना होकर सुनसान टापू पर, पिंजरे में बंद तोते में होती है. पानी में गोता मारो, तोते तक पहुँचो, पहले उसकी एक टाँग तोडो फिर दूसरी. पूछो, कि अगर तोता पिंजरे में बंद था तो उसके दाने पानी का हिसाब कौन रखता था ? कच्ची अंबी और हरी मिर्ची के अभाव में तो तोता वैसे ही दम तोड़ देता और उस से जुड़ी राक्षस की जान अपनेआप परलोकवासी हो जाती. पर नहीं, उसे तो छोटे राजकुमार का इंतेज़ार है.

छोटा राजकुमार जाएगा, राक्षस से राजकुमारी को छुड़ाएगा और फिर हम सब बड़े राजकुमारों की नाक के नीचे, राजकुमारी से शादी कर लेगा. पूछो, भारतीय समाज में ऐसा होता है भला की बड़े भाइयों के होते सबसे छोटा दुल्हन ले आए ? बताइए ऐसा क्यों करने जा रहे थे ?

मैं डर गया. इतने सवाल जवाब तो मेरी बीवी भी नहीं करती. ये छहो मुश्टंडे घेर के पूछ रहे हैं. मैने घबराते हुए जवाब दिया, ‘लोक कथायें मेरी मौलिक रचना नहीं हैं. ये तो सदियों से चली आ रही हैं. आप कहें, तो सबसे बड़े राजकुमार को महिमा मंडित कर दूं, पर तब ना तो संपादक छापेंगे और ना ही किसी तरह छप जाने पर पाठक ही मुझे बक्शेन्गे.’

बड़ा राजकुमार सोचता रहा, फिर छेहो ने आपस में गुटरगूं की.

‘आप मौलिक रचनायें ही लिखा करें. लोक कथायें लिख कर बर्रे के छते में हाथ ना डालें.’

मैने उनकी बात मान ली और सो गया.

Categories: Other Languages, Stories

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